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अंकल सीग्राम

ankal sigram

अनुवाद : कुशाग्र अद्वैत

ग्वेंडोलिन ब्रूक्स

ग्वेंडोलिन ब्रूक्स

अंकल सीग्राम

ग्वेंडोलिन ब्रूक्स

और अधिकग्वेंडोलिन ब्रूक्स

    मेरे अंकल मुझे बहुत चाहते हैं

    मैं साढ़े पाँच बरस का हूँ और किंडरगार्टन जाता हूँ

    वहाँ सब-कुछ साफ़-सुथरा और अच्छा है

    मेरे अंकल छह फ़ीट लंबे हैं और उनकी ठुड्डी पर सात गुमड़े हैं

    मेरे अंकल छह फीट लंबे हैं और लड़खड़ाते हैं

    लड़खड़ाते हैं उन जादुई दवाओं के कारण

    जिनसे हर वक़्त उनकी जेबें भरी रहती हैं

    घर मतलब माँ, पापा और अंकल

    तीन भैया, तीन दीदियाँ और मैं

    हर रात हम घर पर चेकर्स और डोमिनोज़ खेलते हैं

    अंकल मुझसे सट कर बैठते हैं

    उनके पैरों में कोई जूता या मोज़ा नहीं होता

    मेज़ के नीचे एक बड़ा-सा अँगूठा

    मेरे टख़नों को गुदगुदाता है

    मोमजामे के नीचे एक जर्जर घुटना

    मेरे घुटने को रगड़ता है

    मसलता है। मसलता ही जाता है।

    जब हम टीवी देखते हैं

    मेरे अंकल मुझे उठाकर अपनी गोदी में बिठा लेते हैं

    मेरे बैठते ही, बीच में उनका सख़्त-सा कुछ खड़ा हो जाता है

    मैं छटपटाता हूँ, लेकिन वह मुझे बिठाए रखते हैं, और मेरा कान चूमने लगते हैं

    मैं तो लड़की भी नहीं हूँ

    एक बार मैं बाथरूम गया था

    मेरे अंकल ने देख लिया,

    अंदर चले आए, और दरवाज़ा बंद कर दिया

    फिर अपनी लंबी सफ़ेद जीभ

    मेरे कान में लगाते हुए फुसफुसाए,

    ‘‘हम बेस्ट फ़्रेंड्स हैं और एक परिवार हैं

    और हम राज़ रखना बख़ूबी जानते हैं।’’

    मेरे अंकल मुझे बहुत चाहते हैं। मैं परेशान हूँ।

    कि अब मैं उन्हें बिल्कुल नहीं चाहता।

    स्रोत :
    • पुस्तक : सदानीरा पत्रिका
    • संपादक : अविनाश मिश्र
    • रचनाकार : ग्वेंडोलिन ब्रूक्स

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