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क्रिसमस की शाम

christmas ki sham

ईस्टर पर मेरे साथ थीं तुम

क्रिसमस पर नहीं हो

मसीहा का पुनर्जन्म

उसके जन्म से सुखकर था

मैं उसी चर्च में हूँ

जहाँ हम आए थे

गर्मियों की आहट में

धूप की नीम गुनगुनाहट में

तुमने ईस्टर की सर्विस में छोले बनाए थे

और तुम्हारे नाकारा हेल्पर की हैसियत से मैंने भी खाए थे

हवा ठंडी है दिसंबर की इस शाम

मैं उसी पत्थर पर बैठा हूँ

जहाँ बैठकर हमने बात की थी

चर्च के पादरी से

शाम की प्रार्थना में समय है

अभी विराम पर है

मसीह के प्राकट्य की धूमधाम

चर्च के जिन कमरों का ताला खुला है

वहाँ के ख़ालीपन में घूम कर चुका हूँ :

फ़ादर?

कोई है?

जीज़ज़ तो नहीं?

अक्षम्य(?) जुडास ही सही?

आवाज़ लगा चुका हूँ

अब ठंड में खड़े हुए रोंगटे हैं

लाल नीली झड़ियों में जगमगाती मदर मेरी हैं

उनके चारों ओर इस बार लाल फूल हैं

ईस्टर वाले सफ़ेद फूल तुम ले गई हो साथ?

करबद्ध, मदर मेरी के समक्ष

मैं हूँ प्रार्थनारत :

अगले ईस्टर से बहुत पहले लौट आओ तुम!

स्रोत :
  • रचनाकार : देवेश पथ सारिया
  • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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