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स्वप्नमे विचरण करैत

svapnme vichran karait

आनन्द मोहन झा

आनन्द मोहन झा

स्वप्नमे विचरण करैत

आनन्द मोहन झा

और अधिकआनन्द मोहन झा

    बेसी काल रातिमे

    देखैत छी स्वप्न

    बेसी काल स्वप्नमे

    करैत छी यात्रा

    यात्रामे बेसी काल

    अभरैत अछि

    परिचित स्थान, परिचित लोक सभ

    कोना सुखांत कथा किंबा सिनेमा सन

    अंत होइत अछि ओहि स्वप्नक

    हम सकुशल लौटि अबैत छी

    अपन ठामपर

    निन्न फुजलापर जखन

    देखैत छी बाहर

    सुरुज लगैत छथि बेस ललहौन

    हँसैत भोरक बसात बेस प्रियगर

    गाछ-बिरिछ, फूल-पातसँ

    बिहुँसति जानि पड़ैत अछि

    मुदा...

    एम्हर किछु दिनसँ

    स्वप्नक यात्रा

    नहि रहि गेल अछि पहिने सन

    स्वप्नमे देखेत छी हम

    भयाओन सन अकाबोन

    साँप सन सह-सह करैत

    अनचिन्हार बाट सभ

    किसिम-किसिमक जीव-जंतु सभ

    घनेरो अनचिन्हार लोक सभ

    जकरा माथपर जनमल छैक

    कँटैयाक गाछ कतेको

    ओह!

    हम डेराक' क' लैत छी

    अपन दुनू आँखि बन्न

    कि तखने गरदनिपर

    बुझना जाइत अछि

    कोनो जानवरक हाथ

    हम चेहाक' उठि जाइत छी

    फूजि जाइत अछि निन्न

    बाहर घुप्प अन्हार

    रातिए छैक एखन

    भोर होयबामे

    बेस विलम्ब छैक एखन

    चुट्टी काटि-काटि देखैत छी त'

    स्वप्न यथार्थमे

    बुझना नहि जाइत अछि

    कोनो अन्तर

    बेसी काल अभरैत अछि

    आब हमरा स्वप्न...!

    स्रोत :
    • पुस्तक : ई नहि थिक हमर प्रार्थना (पृष्ठ 35)
    • रचनाकार : आनन्द मोहन झा
    • प्रकाशन : नवारम्भ, मधुबनी/पटना
    • संस्करण : 2020

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