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प्रगतिकामी

pragatikami

आनन्द मोहन झा

आनन्द मोहन झा

प्रगतिकामी

आनन्द मोहन झा

और अधिकआनन्द मोहन झा

    बहुत खेला लेलहुँ

    छुआ-छुअंत, चोरा-नुक्की, झिझिरकोना

    कबड्डी-कबड्डी आकि टालि-गुल्ली

    आब किछु दोसर खेल होइक भाय

    कने पैघ सेहो भेलियैक ने आब

    रूचि अछि साहित्यमे

    कोषमे अछि मारिते रास आखर सभ

    त' चलू आब खेलाइत छी आखरहिसँ

    कविता, कथा, नाटक

    एहि विधा सभक

    घनेरो पात्र सभ त' छथिए ने

    खेलयबाक लेल

    सीता, शकुन्तला, अहिल्या

    कुंती, द्रौपदी, यशोधरा

    राम, बुद्ध, दुष्यंत, रावण, कर्ण

    आयु बीति जायत

    मुदा खेल चलिते रहत

    सवाल ठाढ़ करब, प्रतिरोध करब

    लांछन लगायब, कौचर्य करब

    नव दृष्टिकोणक नाम पर

    पुरखा सभक कीर्त्ति पर

    छाउर फेकब

    तहन ने बूझत लोक हमरा काबिल

    सीता, शकुन्तला, द्रौपदी, अहिल्या

    आकि यशोधराक दुख

    नहि त' बूझि सकलखिन

    हुनक माय-बाप, भाय-बन्धु

    पति आकि सर-समाज

    दुख त' बूझि रहल छी

    सैकड़ो साल बाद

    हम-अहाँ सभ

    सेहो चारिटा पोथी पढ़िक'

    हमर इतिहास, इतिहासक पात्र

    सभ छथि आइ मुजरिम घोषित

    हमरा सभक अदालतिमे,

    हम प्रगतिकामी लोक सभ

    भेल छी जज

    सुना रहल छी

    अपन-अपन निर्णय

    सेहो अपन सुविधाक अनुसारे

    मुदा, भाइ...

    इतिहास त' सभक लिखेतैक

    एक ने एक दिन

    हम चिंतित छी सोचिक'

    हमर संतति जखन पूछत सवाल

    एहि खेलबाड़क मादे

    एहि प्रगतिक मादे

    तखन...!

    स्रोत :
    • पुस्तक : नो मेन्स लैण्ड पर ठाढ़ कवि (पृष्ठ 56)
    • रचनाकार : आनन्द मोहन झा
    • प्रकाशन : नवारम्भ, मधुबनी/पटना
    • संस्करण : 2024

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