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मार्था को पत्र (पुनश्च- 6)

martha ko patr (punashch 6)

अनुवाद : नीरजा जयालचंद

डेनिस ब्रूटस

अन्य

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डेनिस ब्रूटस

मार्था को पत्र (पुनश्च- 6)

डेनिस ब्रूटस

और अधिकडेनिस ब्रूटस

    वह हाई स्कूल का पढ़ाकू छात्र लगता था

    पता चला वह यही

    चश्मा अपने सुकुमार चेहरे पर चढ़ाए

    पूरी तरह सुरक्षित और अंतर्मुखी था

    मुझे थोड़ी-सी ईर्ष्या और आश्चर्य हुआ

    वह किस क़दर भोला-भाला अनछुआ लगता था

    उस धुँआधार वहशी माहौल में

    उसकी व्यक्तिगत सुरक्षा के आधार पर कुछ और निकला

    उसका समूचा निरापद संसार—एक स्वप्न चित्र मात्र था

    लगातार लात-घूँसों और अप्राकृतिक दुराग्रहों से विक्षिप्त वह

    भाग निकला था

    हाँ, वह भाग निकला था उन्मुक्त

    एक ऐसी दुनिया में खो गया

    जहाँ वह महफूज़ था सबसे

    पूरी तरह से सदा-सदा के लिए

    ऊपर

    आकाश

    नीचे

    बादल

    और नीचे

    फिर से

    सिर्फ़ बादल

    उस के नीचे

    समुद्र

    धरती का अंत

    अब दिख रहा है

    सिर्फ़ आकाश

    हवा और प्रकाश

    एक नैसर्गिक अनुभूति

    उपलब्ध

    इस शक्तिपात के उपरांत

    नृशंस पाशविक यथार्थ पर जीत के बाद

    हम क्या कुछ

    नहीं कर सकते समाप्त?

    कभी शांति होगी

    हमारे पास

    क्षमता है

    उम्मीद

    और निश्चय भी

    लोग घर लौटेंगे

    स्रोत :
    • पुस्तक : सूखी नदी पर ख़ाली नाव (पृष्ठ 370)
    • संपादक : वंशी माहेश्वरी
    • रचनाकार : डेनिस ब्रूटस
    • प्रकाशन : संभावना प्रकाशन
    • संस्करण : 2020

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