तुम साफ़-सुथरे अपने काम की पोशाक में
ख़ामोश सीधे खड़े आँखें नहीं मिलाने को
अपनी विनय के पीछे अटके हुए
क्या तुम वेटर हो इस शानदार
ख़ुशबूदार जगह में
तुमसे कहा गया है कि इस समय
तुम्हारी कोई पहचान नहीं है
तुम्हारा कोई नाम नहीं है
तुम्हें मुस्कराते हुए दिखना है
तुम कोशिश कर रहे हो कि भूल जाओ
अपना परिवार अपने दोस्त
और अपनी भाषा, जो सिर्फ़ आज़ादी में
खुल कर आती है
तुम योग्य कर्मी माने जाओगे
यदि भूल जाओ कि तुम ग़रीब हो
कि काम के बाद तुम्हें पहिनने हैं
अपने पुराने कपड़े जिनको देखकर
तुम सोच में पड़ जाते हो,
तुम्हें लौटना है एक मैली बस्ती के
उजाड़ घर में
बदबूदार गलियों से गुज़रना है
कीचड़ के छींटों से बचना है
अपनी बीबी और बच्चों को प्यार करना है
और अपने असमंजस से रोज़ उबरना है
24 घंटे की चर्या में तुम रोज़
उलटे-पलटे जाते हो
दोनों वक़्त उदास होते हो
वातानूकूलित जगह पर काम पर जाते हुए
डरते हो और घर लौटते समय
बेचैन हो जाते हो
मैं भी वेटर बनना चाहता हूँ
बढ़िया पोशाक और कैप पहिने
मैं आदतन मुस्कराता हूँ और मिलने वालों की
आँखों में सीधे देखता हूँ
विनय की भाषा मुझे अपने लोगों से मिली है
मैं ग्राहकों को इजाज़त नहीं दूँगा
कि वे मेरी आवाज़ के ऊपर पाँव रखते हुए
निकल जाएँ और मेरी तनख़्वाह मैनेजर के आस-पास
ज़रूर होनी चाहिए
मेरे बच्चे भी कभी आएँगे यहाँ
और इज़्ज़त का खाना खाएँगे।
- पुस्तक : पानी है तो फूटेगा (पृष्ठ 77)
- रचनाकार : राजेश सकलानी
- प्रकाशन : परिकल्पना प्रकाशन
- संस्करण : 2019
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