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मृगजल ही सही

mrigjal hi sahi

पद्मजा घोरपड़े

अन्य

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पद्मजा घोरपड़े

मृगजल ही सही

पद्मजा घोरपड़े

और अधिकपद्मजा घोरपड़े

    मृगजल ही सही

    हमारा विश्वास गहरा है

    लम्हा-लम्हा सूरज बुनने में

    हमारी आँखें माहिर हैं

    बूँद-बूँद रात पकाने में

    हमारे चूल्हे प्रौढ़ हैं

    मौसम शहीद हुए तो होने दो

    भविष्य कुंभकर्ण-सा सोया है तो सोने दो

    जब तक मिट्टी में

    सोंधी गंध शेष है

    अंजुलियाँ दर्पण बनी हुई हैं

    पैर गीतों की कड़ियाँ बने हुए हैं

    तब तक

    हम

    बिरवा-बिरवा खेती करेंगे

    तिनका-तिनका किलकारियाँ सँजोएँगे

    चप्पा-चप्पा आकाश नापते हुए

    हम

    सूरजमुखी फूल हो लेंगे

    किरण-किरण बादल तलाशते हुए

    हम

    इंद्रधनुष हो जाएँगे

    मृगजल ही सही

    हम रेगिस्तान पी जाएँगे!

    स्रोत :
    • पुस्तक : पारदर्शी आँधियाँ (पृष्ठ 134)
    • रचनाकार : पद्मजा घोरपड़े
    • प्रकाशन : वाणी प्रकाशन
    • संस्करण : 1999

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