उसी शहर में

ध्रुव शुक्ल

उसी शहर में

ध्रुव शुक्ल

और अधिकध्रुव शुक्ल

    उसी शहर में नाल गड़ी है मेरी

    उसी शहर में दाल पकी है मेरी

    उसी शहर में रहते मेरे दोस्त

    उसी शहर में बीवी बच्चे

    उसी शहर खाल खिंची है मेरी

    उसी शहर में बहुत दिनों तक

    रहने से दुख होता है

    उसी शहर में बहुत दिनों के बाद

    लौट आने से सुख होता है

    स्रोत :
    • पुस्तक : खोजो तो बेटी पापा कहाँ हैं (पृष्ठ 17)
    • रचनाकार : ध्रुव शुक्ल
    • प्रकाशन : वाग्देवी प्रकाशन
    • संस्करण : 1989

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