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जाने कइसन जादू

jane kaisan jadu

मिथिलेश ‘गहमरी’

मिथिलेश ‘गहमरी’

जाने कइसन जादू

मिथिलेश ‘गहमरी’

और अधिकमिथिलेश ‘गहमरी’

    जाने कइसन जादू-मंतर हो गइल

    रेत छन भर में समुन्दर हो गइल

    बा समय के खेल अचरज से भरल

    बाग के रखवार बानर हो गइल

    आके देखीं मुखौटा के कमाल

    नागफनियो, आज गूलर हो गइल

    रूप तऽ बाटे हिरन-जइसन, मगर

    लोग, मन से आज अजगर हो गइल

    फूल के बिहँसल तबे सुकलान, जब

    बाग सउँसे गंध से तर हो गइल

    मन में दउलत के उठल अइसन लहर

    आँखि अछइत, लोग आन्हर हो गइल

    बेग आन्ही के बढ़ल अइसन, कि आज

    परबतो के हेठ मामर हो गइल

    माथ पर आशीष माई के रहे

    आग बोअत घाम, छप्पर हो गइल

    स्रोत :
    • पुस्तक : केकरा से माँगीं अँजोर (पृष्ठ 18)
    • रचनाकार : मिथिलेश ‘गहमरी’
    • प्रकाशन : सत्यांश उपक्रम (प्रा.) लिमिटेड, बलिया
    • संस्करण : 2019

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