गीत-गज़लन के भुई दे दीह
geet gazlan ke bhui de deeh
सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’
Satishwar Sahay Verma 'Satish'
गीत-गज़लन के भुई दे दीह
geet gazlan ke bhui de deeh
Satishwar Sahay Verma 'Satish'
सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’
और अधिकसतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’
गीत-गज़लन के भुई दे दीह।
शब्द ओठन से छुई दे दीह ॥
अनकहल बात करेजा बेधे,
घाव पोंछेला रुई, दे दीह॥
सी सकीं हम कहीं चेंथल चादर,
नेह के नरम सुई, दे दीह॥
अपना जूड़ा के सुखाइल गजरा,
पसन होखी ना दुई, दे दीह॥
सूंघ के जान लीं तोहार पाती,
लोर मुसकात चुई दे दीह॥
प्रेम रस बूँद बस दू-चारे गो,
जग में केहू ना मुई, दे दीह॥
- पुस्तक : जल के धारा में दीयना (भोजपुरी गजल-संग्रह) (संकलन : अम्बदत्त गुंजन) (पृष्ठ 42)
- रचनाकार : सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’
- प्रकाशन : भारतीय भोजपुरी साहित्य परिषद, मुजफ्फरपुर
- संस्करण : 1996
Additional information available
Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.
About this sher
rare Unpublished content
This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.