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सुनसान पांतरमे

sunsan pantarme

सुधांशु ‘शेखर’ चौधरी

सुधांशु ‘शेखर’ चौधरी

सुनसान पांतरमे

सुधांशु ‘शेखर’ चौधरी

और अधिकसुधांशु ‘शेखर’ चौधरी

    सुधिये हुनक मोनक हमर शृंगार बनल अछि,

    जिनगीक रोगक हमर उपचार बनल अछि

    काँटक भरल झंखारमे ओझरायल छी जखन,

    फूले हुनक गन्धे हमर आधार बनल अछि

    सुनसान पाँतरमे जखन अपस्यांत भेलहुएँ,

    छाहरि हुनक मधुवातकेर संचार बनल अछि

    बड़ प्याससँ तबधल जखन हम आँट भेल छी,

    मुस्की हुनक अख्यासमे रसधार बनल अछि

    कोड़ो गनैत आहिमे हम राति बिताबी,

    सपनाक एक मधुरतम संसार बनल अछि

    जोही कते हम बाट से फड़िछा लियऽ कने,

    चलते नाम तार लाचार बनल अछि

    स्रोत :
    • पुस्तक : गजल ओ गीत
    • रचनाकार : शेखर प्रकाशन, पटना
    • प्रकाशन : सुधांशु ‘शेखर’ चौधरी
    • संस्करण : 1991

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