Font by Mehr Nastaliq Web

उमड़ल नदी के धार

umDal nadi ke dhaar

जौहर शफियाबादी

जौहर शफियाबादी

उमड़ल नदी के धार

जौहर शफियाबादी

और अधिकजौहर शफियाबादी

    उमड़ल नदी के धार बा, हम का गजल कहीं

    मुर्छित भइल बाहार बा, हम का गजल कहीं

    पँखुरी गुलाबऽ के कहीं, की ठोर हम कहीं

    असमन कमल तार बा, हम का गजल कहीं

    बा फूल अंगऽ अंगऽ त, मुखड़ा बा चाँद जइसन

    कजरा बनल अब कटार बा, हम का गजल कहीं

    तुलसी, कबीर, जायसी, कालिदास के

    एक-जुट भइल श्रृंगार बा, हम का गजल कहीं

    अँगना में चाँदो आके, ऊदासी लूटा गइल

    भगिये भइल ऊलार बा, हम का गजल कहीं

    'जौहर' जी उनका बात के, का फुलझड़ी कहीं

    सावन के रस फूहार बा, हम का गजल कहीं

    स्रोत :
    • पुस्तक : रंगमहल (पृष्ठ 148)
    • रचनाकार : जौहर शफियाबादी
    • प्रकाशन : शिवालिक प्रकाशन, दिल्ली
    • संस्करण : 2019

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY