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आँख पर पट्टी रहे और अक़्ल पर ताला रहे

ankh par patti rahe aur aql par tala rahe

अदम गोंडवी

अदम गोंडवी

आँख पर पट्टी रहे और अक़्ल पर ताला रहे

अदम गोंडवी

और अधिकअदम गोंडवी

    आँख पर पट्टी रहे और अक़्ल पर ताला रहे
    अपने शाहे-वक़्त का यूँ मर्तबा आला रहे

    देखने को दे उन्हें अल्लाह कंप्यूटर की आँख
    सोचने को कोई बाबा बाल्टीवाला1 रहे

    तालिब-ए-शोहरत2 हैं कैसे भी मिले मिलती रहे
    आए दिन अख़बार में प्रतिभूति घोटाला रहे

    एक जनसेवक को दुनिया में अदम क्या चाहिए
    चार छै चमचे रहें माइक रहे माला रहे
    स्रोत :
    • पुस्तक : धरती की सतह पर (पृष्ठ 40)
    • संपादक : ओम निश्चल
    • रचनाकार : अदम गोंडवी
    • प्रकाशन : अनुज प्रकाशन
    • संस्करण : 2023

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