Font by Mehr Nastaliq Web

गुहार

guhar

गोरख पांडेय

और अधिकगोरख पांडेय

    सुरु बा किसान के लड़इया, चल तूहूं लड़े बदे भइया।

    कब तक सुतब, मूंदि के नयनवा

    कब तक ढोवब सुख के सपनवा

    फूटलि ललकि किरनिया, चल तूहूं लड़े बदे भइया

    सुरु बा किसान के लड़इया, चल तूहूं लड़े बदे भइया।

    तोहरे पसीनवा से अन धन सोनवा

    तोहरा के चूसि-चूसि बढ़े उनके तोनवा

    तोह के बा मुट्ठी भर मकइया, चल तूहूं लड़े वदे भइया

    सुरु बा किसान के लड़इया, चल तूहूं लड़े बदे भइया।

    तोहरे लरिकवन से फउजि बनावे

    उनके बनूकि देके तोरे पर चलावें

    जेल के बतावे कचहरिया, चल तूहूं लड़े बदे भइया

    सुरु वा किसान के लड़इया, चल तूहूं लड़े बदे भइया।

    तोहरी अंगुरिया पर दुनिया टिकलि बा

    बखरा में तोहरे नरके परल बा

    उठ, भहरावे के दुनिया, चल तूहूं लड़े बदे भइया

    सुरु वा किसान के लड़इया, चल तूहूं लड़े बदे भइया।

    जनमलि तोहरे खून से फउजिया

    खेत करखनवा के ललकी फउजिया

    तोहके बोलावे दिन रतिया, चल तूहूं लड़े बदे भइया

    सुरु वा किसान के लड़इया, चल तूहूं लड़े बदे भइया।

    स्रोत :
    • पुस्तक : गोरख पाण्डेय के भोजपुरी गीत (पृष्ठ 12)
    • संपादक : जीतेन्द्र वर्मा
    • रचनाकार : गोरख पाण्डेय
    • प्रकाशन : राष्ट्रीय पुस्तक न्यास
    • संस्करण : 2009

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY