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मैना

maina

गोरख पांडेय

और अधिकगोरख पांडेय

    एक दिन राजा मरलें आसमान में ऊड़त मैना

    बान्हि के घरे ले अइलें मैना ना।

    एकरे पिछले जनम के करम

    कइलीं हम सिकार के धरम

    राजा कहै कुंअर से अब तू लेके खेलऽ मैना

    देखऽ कतना सुन्दर मैना ना।

    खेले लगलें राजकुमार

    उनके मन में बसल सिकार

    पहिले पांखि कतरि के कहलें अब तू उड़ि जा मैना

    मेहनत कै के उड़ि जा मैना ना।

    पांखि बिना के उड़े पाय

    कुंअर के मन में गुस्सा छाय

    तब फिर टांग तोड़ि के कहलें अब तू नाचऽ मैना

    ठुमकि-ठुमकि के नाचऽ मैना ना।

    पांव बिना के नाचे पाय

    कुंअर गइलें अब बउराय

    तब फिर गला दबा के कहलें अब तूं गावऽ मैना

    प्रेम से मीठा गावऽ मैना ना।

    मरिके कइसे गावे पाय

    कुंअर राजा के बुलवाय

    कहले बड़ा दुष्ट वा एको बाति माने मैना

    सारा खेल बिगाड़े मैना ना।

    जबले खून पिअल ना जाय

    तबले कवनो काम आय

    राजा कहें कि सीखा कइसे चूसल जाई मैना

    कइसे स्वाद बढ़ाई मैना ना।

    स्रोत :
    • पुस्तक : गोरख पाण्डेय के भोजपुरी गीत (पृष्ठ 15)
    • संपादक : जीतेन्द्र वर्मा
    • रचनाकार : गोरख पाण्डेय
    • प्रकाशन : राष्ट्रीय पुस्तक न्यास
    • संस्करण : 2009

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