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बदरिया

badriya

अन्नू रिज़वी

अन्नू रिज़वी

बदरिया

अन्नू रिज़वी

और अधिकअन्नू रिज़वी

    सजन देखो फिर घिर के आई बदरिया

    कहाँ से कहाँ तक बिछाई बदरिया

    सजन देखो फिर घिर के आई बदरिया

    मगर तुम्हरे बिन कुछ भी अच्छा ना लागे

    मैं सोचूँ तुम्हें टूटें आँसू के धागे

    हो नैनों में जैसे समाई बदरिया

    सजन देखो फिर घिर के आई बदरिया

    तुम्ही कह गए थे कि सावन सुहाना

    बनेगा हमारे मिलन का बहाना

    तभी से जिया में बसाई बदरिया

    सजन देखो फिर घिर के आई बदरिया

    मैं समझी थी अपने सजन से मिलूँगी

    बिना मन के हूँ आज मन से मिलूँगी

    मगर अपने संग कुछ ना लाई बदरिया

    सजन देखो फिर घिर के आई बदरिया

    वो बारिश की रिम-झिम में झूले का पड़ना

    वो सावन के गीतों पे पेंगों का बढ़ना

    बड़े धूम से है जगाई बदरिया

    सजन देखो फिर घिर के आई बदरिया

    स्रोत :
    • रचनाकार : अनु रिज़वी
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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