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बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

11 अप्रैल 2024

‘'जैसी हर एक दिल में है इस ईद की ख़ुशी'’

‘'जैसी हर एक दिल में है इस ईद की ख़ुशी'’

छतों पर ठट का ठट जमा है, शाम हल्की शफ़क़ में डूबी आसमान पर लहरों के साथ किसी बच्चे की तरह अटखेलियाँ करती मुस्कुरा रही है। अभी सूरज डूबने में वक़्त है, मगर टोपियाँ, दुपट्टे नुमूदार हो रहे हैं। आख़िरी इफ़्त