Font by Mehr Nastaliq Web

देश भर में मनाया गया राष्ट्रीय पठन दिवस

गए बुधवार को नेशनल बुक ट्रस्ट, इंडिया ने भारत के पुस्तकालय आंदोलन के जनक पी.एन. पन्निकर को याद करते हुए देश भर में राष्ट्रीय पठन दिवस मनाया। इस अवसर पर नई दिल्ली, देहरादून, पटना, लखनऊ, भोपाल, वाराणसी, मुंबई, गुवाहाटी, अगरतला, कटक, चेन्नई, हैदराबाद और कोच्चि देश भर में अलग-अलग स्थानों पर बच्चों, शिक्षकों-प्रशिक्षकों और मेंटर्स के लिए पठन-पाठन से संबंधित रचनात्मक गतिविधियों का आयोजन हुआ।

पठन-संस्कृति को बढ़ावा देने की इस मुहिम से हज़ारों बच्चे, शिक्षक, अभिभावक ऑफ़लाइन और ऑनलाइन जुड़े। देश के अलग-अलग स्थानों पर आयोजित कार्यक्रमों में बच्चों को पठन अभ्यास करवाया गया। बाल साहित्य विशेषज्ञों ने बच्चों से कहानियाँ, कविताएँ पढ़वाईं और बताया कि किस तरह विषय के अनुरूप भावों के साथ प्रस्तुत किया जाता है। कार्यक्रमों में बच्चों की पढ़ने की आदत में सुधार करने में सहायता की गई। 

बच्चों को पुस्तकें पढ़ने और राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय के ज़रिए डिजिटल रीडिंग पर भी ज़ोर दिया गया। उन्हें बताया गया कि किस तरह वे अपने पसंदीदा विषयों को मजेदार ढंग से पढ़कर याद रख सकते हैं। कार्यक्रमों में उपस्थित सभी बच्चों को एनबीटी, इंडिया की तरफ़ से पुस्तकें भेंट-स्वरूप दी गईं।   

राष्ट्रीय पठन दिवस पर देश भर में आयोजित होने वाले इन कार्यक्रमों में राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय के बारे में भी बच्चों और अभिभावकों को जानकारी दी गई। शिक्षा मंत्रालय द्वारा तैयार और एनबीटी, इंडिया द्वारा संचालित इस ऐप को अभिभावकों और शिक्षकों ने डाउनलोड किया और अपनी मनपसंद पुस्तकों का चयन कर उन्हें पढ़ने का आनंद भी उठाया। इस ऐप के माध्यम से देश भर के पाठकों को कार्यक्रम से लाइव जुड़ने का अवसर भी दिया गया था। इस डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर अब तक 5.27 लाख से अधिक पाठक ऑनलाइन पुस्तकें पढ़ चुके हैं और यह संख्या तेज़ी से बढ़ रही है। 

राष्ट्रीय पठन दिवस पर नेशनल बुक ट्रस्ट द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में देश भर से प्रसिद्ध साहित्यकार और मेंटर्स भी जुड़े। हैदराबाद में विवेकानंद स्कूल में आयोजित कार्यक्रम में प्रसिद्ध बाल साहित्यकार और साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित चोक्कपु वेंकटरामा ने बच्चों को कहानियाँ सुनाते हुए उन्हें भी स्वरचित कहानियाँ सुनाने के लिए प्रोत्साहित किया। वाराणसी के लाल बहादुर शास्त्री इंटरनेशनल एयरपोर्ट में एनबीटी, इंडिया के बने एयरपोर्ट रीडिंग लॉन्ज में एक साथ कई पाठकों ने पुस्तकें पढ़ीं। देहरादून में जहाँ प्रसिद्ध बाल कथावाचक अनूभा ने बच्चों को कहानियाँ सुनाईं, वहीं कश्मीरी गेट मेट्रो स्टेशन पर स्थापित एनबीटी, इंडिया की बुकशॉप में डॉ. टीना कुमारी ने दिल्ली विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के लिए कविता-वाचन-सत्र का आयोजन किया। पटना में पलटन समूह से आए रोहित कुमार ने और लखनऊ में अमिता दुबे ने कहानियाँ सुनाईं। वहीं बेंगलुरु में बी.पी.एम.एस. गवर्नमेंट स्कूल में एनबीटी, इंडिया के कार्यक्रम में बाल साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित कन्नड़ लेखक मत्तूरु सुब्बण्णा और कथावाचक अश्वनी शानबाग ने बच्चों को कहानियाँ सुनाकर उन्हें भी पढ़ने की आदत विकसित करने के लिए प्रेरित किया।   

'बेला' की नई पोस्ट्स पाने के लिए हमें सब्सक्राइब कीजिए

Incorrect email address

कृपया अधिसूचना से संबंधित जानकारी की जाँच करें

आपके सब्सक्राइब के लिए धन्यवाद

हम आपसे शीघ्र ही जुड़ेंगे

25 अक्तूबर 2025

लोलिता के लेखक नाबोकोव साहित्य-शिक्षक के रूप में

25 अक्तूबर 2025

लोलिता के लेखक नाबोकोव साहित्य-शिक्षक के रूप में

हमारे यहाँ अनेक लेखक हैं, जो अध्यापन करते हैं। अनेक ऐसे छात्र होंगे, जिन्होंने क्लास में बैठकर उनके लेक्चरों के नोट्स लिए होंगे। परीक्षोपयोगी महत्त्व तो उनका अवश्य होगा—किंतु वह तो उन शिक्षकों का भी

06 अक्तूबर 2025

अगम बहै दरियाव, पाँड़े! सुगम अहै मरि जाव

06 अक्तूबर 2025

अगम बहै दरियाव, पाँड़े! सुगम अहै मरि जाव

एक पहलवान कुछ न समझते हुए भी पाँड़े बाबा का मुँह ताकने लगे तो उन्होंने समझाया : अपने धर्म की व्यवस्था के अनुसार मरने के तेरह दिन बाद तक, जब तक तेरही नहीं हो जाती, जीव मुक्त रहता है। फिर कहीं न

27 अक्तूबर 2025

विनोद कुमार शुक्ल से दूसरी बार मिलना

27 अक्तूबर 2025

विनोद कुमार शुक्ल से दूसरी बार मिलना

दादा (विनोद कुमार शुक्ल) से दुबारा मिलना ऐसा है, जैसे किसी राह भूले पंछी का उस विशाल बरगद के पेड़ पर वापस लौट आना—जिसकी डालियों पर फुदक-फुदक कर उसने उड़ना सीखा था। विकुशु को अपने सामने देखना जादू है।

31 अक्तूबर 2025

सिट्रीज़ीन : ज़िक्र उस परी-वश का और फिर बयाँ अपना

31 अक्तूबर 2025

सिट्रीज़ीन : ज़िक्र उस परी-वश का और फिर बयाँ अपना

सिट्रीज़ीन—वह ज्ञान के युग में विचारों की तरह अराजक नहीं है, बल्कि वह विचारों को क्षीण करती है। वह उदास और अनमना कर राह भुला देती है। उसकी अंतर्वस्तु में आदमी को सुस्त और खिन्न करने तत्त्व हैं। उसके स

18 अक्तूबर 2025

झाँसी-प्रशस्ति : जब थक जाओ तो आ जाना

18 अक्तूबर 2025

झाँसी-प्रशस्ति : जब थक जाओ तो आ जाना

मेरा जन्म झाँसी में हुआ। लोग जन्मभूमि को बहुत मानते हैं। संस्कृति हमें यही सिखाती है। जननी और जन्मभूमि स्वर्ग से बढ़कर है, इस बात को बचपन से ही रटाया जाता है। पर क्या जन्म होने मात्र से कोई शहर अपना ह

बेला लेटेस्ट