आज है ‘हिन्दवी’ का विशेष आयोजन ‘अनंता’
हिन्दवी डेस्क
28 मार्च 2026
हिंदी साहित्य की दुनिया में स्त्री-स्वर हमेशा से मौजूद रहा है, बस उसे पहचानने और सुनने की दृष्टि समय-समय पर बदलती रही है। इतिहास के लंबे गलियारों में स्त्रियों की रचनात्मकता अक्सर घर की चौखट, स्मृतियों और निजी अनुभवों के भीतर सीमित मान ली गई। लेकिन सच्चाई यह है कि स्त्री-लेखन हमेशा जीवन-समाज के गहरे और व्यापक प्रश्नों से जुड़ा रहा है। इसी रचनात्मक परंपरा को स्मरण और विस्तार देने का एक महत्त्वपूर्ण प्रयास है—‘अनंता’।
‘हिन्दवी’ का यह आयोजन ‘अनंता’ एक ऐसा साहित्यिक आयोजन है, जो स्त्री-रचनाशीलता की बहुरंगी उपस्थिति को केंद्र में रखता है। यह कार्यक्रम केवल एक साहित्यिक गोष्ठी नहीं; बल्कि विचार, कविता और संवाद के माध्यम से स्त्री-अनुभवों के व्यापक संसार को सामने लाने का प्रयास है।
हिंदी साहित्य के इतिहास में स्त्रियों की उपस्थिति अनेक रूपों में दिखाई देती है—कभी भक्ति की निर्भीक आवाज़ के रूप में, कभी आधुनिक कविता और कथा की जटिल संवेदनाओं के रूप में। फिर भी यह स्वीकार करना होगा कि साहित्यिक परंपरा के इतिहास में स्त्री-स्वरों को हमेशा वह स्थान नहीं मिला, जिसकी वे अधिकारी रहीं।
‘अनंता’ इस धारणा को चुनौती देता है। यह मंच यह याद दिलाता है कि स्त्री-अनुभव केवल निजी नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक इतिहास का एक अनिवार्य हिस्सा है। जब स्त्री लिखती है, तो वह केवल अपने बारे में नहीं लिखती; वह अपने समय, समाज और स्मृतियों के जटिल ताने-बाने को भी शब्द देती है।
‘अनंता’ नाम स्वयं अपने भीतर एक प्रतीकात्मक अर्थ समेटे हुए है। ‘अनंत’ का स्त्रीलिंग रूप होने के कारण यह स्त्री-अस्तित्व की असीम संभावनाओं, उसके अनुभवों की गहराई और रचनात्मकता की निरंतरता को दर्शाता है। यह आयोजन इस बात को रेखांकित करता है कि स्त्री-लेखन किसी सीमित दायरे का विषय नहीं; बल्कि जीवन, समाज, इतिहास और भविष्य से जुड़े अनगिनत आयामों का प्रतिनिधित्व करता है।
स्त्री-लेखन की बहुरंगी उपस्थिति पर केंद्रित इस आयोजन में विचार-विमर्श और कविता-पाठ के दो प्रमुख सत्र होंगे।
आयोजन का पहला सत्र विमर्श-आधारित सत्र है, जिसका विषय है—‘हिंदी साहित्य की उपेक्षिताएँ’। इस सत्र में हिंदी साहित्य के इतिहास और वर्तमान में स्त्रियों की स्थिति, उनकी उपेक्षा, संघर्ष और उपलब्धियों बात होगी। यहाँ यह प्रश्न उठता है कि हिंदी साहित्य के इतिहास में स्त्री-लेखन की यात्रा कैसी रही है, किन आवाज़ों को सुना गया और किन्हें अनसुना कर दिया गया। यह विमर्श केवल अतीत की समीक्षा नहीं, बल्कि वर्तमान की समझ और भविष्य की संभावनाओं को भी खोलता है। इस तरह की बातचीत साहित्यिक परंपरा के उन पहलुओं को उजागर करती है, जिन्हें लंबे समय तक हाशिये पर रखा गया। हिंदी साहित्य में कई ऐसी स्त्री रचनाकार रही हैं; जिनकी रचनाएँ तो महत्त्वपूर्ण थीं, लेकिन उन्हें पर्याप्त पहचान नहीं मिली।
विमर्श सत्र में बातचीत के लिए रेखा सेठी (आलोचक), रश्मि रावत (आलोचक) और प्रियंका दुबे (लेखक-पत्रकार) मंच साझा करेंगी।
दूसरा सत्र 'नई सृष्टि नई स्त्री' (कविता-पाठ) है, जिसमें समकालीन हिंदी कवि—रश्मि भारद्वाज, जोशना बैनर्जी आडवाणी, अंकिता आनंद और मृगतृष्णा का कविता-पाठ होगा। इस सत्र में हम-आप स्त्री-जीवन की विविध अनुभूतियाँ—पहचान, संघर्ष, प्रेम, आत्मसम्मान और स्वतंत्रता—का पाठ सुन पाएँगे।
कार्यक्रम के दोनों सत्रों का संचालन कवि-लेखक शोभा अक्षर द्वारा किया जाएगा।
अंततः ‘अनंता’ हिंदी साहित्य में उस अनंत रचनात्मक ऊर्जा का उत्सव है, जो स्त्री-स्वर के माध्यम से व्यक्त होती है। यह आयोजन हमें याद दिलाता है कि साहित्य का संसार तभी समृद्ध होता है, जब उसमें सभी आवाज़ों को समान स्थान मिले—और स्त्री-रचनाशीलता उसी समृद्धि का एक अनिवार्य आधार है।
‘अनंता’ के विषय में शेष सूचनाओं के लिए यहाँ देखिए : अनंता
'बेला' की नई पोस्ट्स पाने के लिए हमें सब्सक्राइब कीजिए
कृपया अधिसूचना से संबंधित जानकारी की जाँच करें
आपके सब्सक्राइब के लिए धन्यवाद
हम आपसे शीघ्र ही जुड़ेंगे
बेला पॉपुलर
सबसे ज़्यादा पढ़े और पसंद किए गए पोस्ट