बिस्कोहर की माटी
पूरब टोले के पोखर में कमल फूलते। भोज में हिंदुओं के यहाँ भोजन कमल-पत्र पर परोसा जाता। कमल-पत्र को पुरइन कहते। कमल के नाल को भसीण कहते। आसपास कोई बड़ा कमल-तालाब था—लेंवडी का ताल। अकाल पड़ने पर लोग उसमें से भसीण (कमल-ककड़ी) खोदकर बड़े-बड़े खाँचों में सर