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आइज़क न्यूटन

1643 - 1727

आइज़क न्यूटन की संपूर्ण रचनाएँ

उद्धरण 9

मैं खगोलीय पिंडों की गति की गणना तो कर सकता हूँ, लेकिन मनुष्यों के पागलपन की नहीं।

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अगर मैंने आगे कुछ देखा है, तो वह महान लोगों के कंधों पर बैठ कर देखा है।

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प्रकृति सादगी से प्रसन्न होती है, और प्रकृति कोई मूर्ख नहीं है।

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मैं नहीं जानता कि संसार के समक्ष मैं क्या लग सकता हूँ किंतु स्वयं को मैं केवल एक ऐसा लड़का प्रतीत होता हूँ जो सागर तट पर खेल रहा है, और जो अधिक चिकनी गुटिका या अधिक सुन्दर सीपी को जब-तब पा लेने में स्वयं को लगा रहा है जबकि सत्य का विशालतर महासागर मेरे सम्मुख पूर्णतया अनदेखा पड़ा है।

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समझदारी वह हुनर है, जिससे किसी को शत्रु बनाए बग़ैर अपनी बात रखी जा सकती है।

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