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गीताश्री

1965 | मुज़फ़्फ़रपुर, बिहार

सुपरिचित कथाकार और पत्रकार।

सुपरिचित कथाकार और पत्रकार।

गीताश्री के बेला

17 मार्च 2026

कहानी : मैं किसी के लिए कुछ नहीं हूँ

कहानी : मैं किसी के लिए कुछ नहीं हूँ

“अब भी क्या गले न मिलोगी? अभी तक वही हिचक... मिल लो यार, क्या पता अगली मुलाक़ात हो न हो।” उसकी पसीजी हुई हथेलियाँ छूट रही थीं मुझसे। वो गले लगने या लगाने को बेताब था। विदा की बेला में ये बातें मेर

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