अंबुज यादव के बेला
जौहर : कायरता नहीं, मध्यकालीन अस्मिता और स्वाधीनता-बोध का आख्यान
समकालीन नैतिक कसौटियों से मध्यकालीन जौहर को तौलकर उसे ‘कायरता’ की संज्ञा दे देना उस संपूर्ण सांस्कृतिक चेतना की उपेक्षा है, जिसमें अर्पण, तर्पण, समर्पण, पवित्रता, शुचिता, मर्यादा, आत्मसंयम, चरित्र, स