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कवयित्रियाँ

स्त्री-विमर्श भारतीय समाज और साहित्य में उभरे सबसे महत्त्वपूर्ण विमर्शों में से एक है। स्त्री-जीवन, स्त्री-मुक्ति, स्त्री-अधिकार और मर्दवाद और पितृसत्ता से स्त्री-संघर्ष को हिंदी कविता ने एक अरसे से अपना आधार बनाया हुआ है। यह प्रस्तुति हिंदी कविता के इस स्त्री-स्वर को ही समर्पित है।

नई पीढ़ी की कवयित्री। स्त्रीवादी विचारों के लिए उल्लेखनीय।

नई पीढ़ी की कवयित्री। संगीत में रुचि।

सुपरिचित कवयित्री। कविताओं में उपस्थित संगीतात्मक वैभव के लिए उल्लेखनीय।

नई पीढ़ी की कवि।

इस सदी में सामने आईं कवयित्री। स्त्रीवादी विचारों के लिए उल्लेखनीय।

हिंदी की सुपरिचित कवयित्री और कथाकार। साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित।

नवें दशक की कवयित्री। भाषिक सादगी और विषय-चयन के लिए उल्लेखनीय।

नई पीढ़ी की कवि। ट्रांस-स्त्री-अस्मिता से संबद्ध।

पंजाबी की लोकप्रिय कवयित्री-लेखिका। भारतीय ज्ञानपीठ से सम्मानित।

अभिनय के संसार से संबद्ध हिंदी कवयित्री और गद्य-लेखिका।

नई पीढ़ी की लेखिका, कवयित्री।

नई पीढ़ी की सुपरिचित कवयित्री।

इस सदी में सामने आईं हिंदी कवयित्री।

नई पीढ़ी की सुपरिचित कवयित्री।

नई पीढ़ी की कवयित्री।

1914 -2000 पुणे

मराठी की सुपरिचित कवयित्री-कथाकार। साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित।

नई पीढ़ी की कवि।

नई पीढ़ी की कवि-कलाकार।

1934 -2008 उन्नाव

अज्ञेय द्वारा संपादित ‘तीसरा सप्तक’ की कवयित्री। प्रसिद्ध साहित्यकार अजित कुमार की बहन।

रीतिकाल की कवयित्री। पहेलियों के लिए स्मरणीय।

सुपरिचित कवि-गद्यकार। साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित।

नई पीढ़ी की समर्थ व सशक्त कवयित्री।

'वागड़ की मीरा' के उपनाम से भूषित। राजस्थान की निर्गुण भक्ति परंपरा से संबद्ध।

नई पीढ़ी की कवयित्री। शोध, गद्य-लेखन और अनुवाद-कार्य में भी सक्रिय।

माधुर्य गुणयुक्त कविता में सलज्ज शृंगार की विवेचना करने वाली भारतेंदु युगीन अल्पज्ञात कवयित्री।

कृष्णभक्ति के सरस पदों के लिए ख्यात।

नई पीढ़ी की कवयित्री।

रीतिकाल के अंतिम वर्षों में सक्रिय कवयित्री। भक्ति, नीति और शृंगार कविता के वर्ण्य-विषय।

1941 -2014 मुंबई

सुपरिचित कवयित्री और कथाकार।

इस सदी में सामने आईं हिंदी कवयित्री और कथाकार।

सुपरिचित कवयित्री-कथाकार और अनुवादक। भारतभूषण अग्रवाल पुरस्कार से सम्मानित।

1643

रीतिकाल की भक्त कवयित्री। हृदय के मार्मिक भावों से गुंथी सहज-सरल कविताओं के लिए ख्यात।

आधुनिककाल की अलक्षित कवयित्री। इतिवृतात्मक शैली में राष्ट्रप्रेम को कविताओं का वर्ण्य-विषय बनाया।

1693 -1773 अलवर

'चरनदासी संप्रदाय' से संबंधित संत चरणदास की शिष्या। कविता में सर्वस्व समर्पण और वैराग्य को महत्त्व देने के लिए स्मरणीय।

सुपरिचित कवयित्री और गद्यकार।

सुपरिचित लेखिका। लोकचित्रकला, कविता और ललित निबंध के सृजन में सिद्धहस्त।

नई पीढ़ी की कवयित्री। स्त्रीवादी विचारों के लिए उल्लेखनीय।

नई पीढ़ी की सुपरिचित कवयित्री।

नवें दशक की कवयित्री। जनवादी संवेदना और सरोकारों के लिए उल्लेखनीय।

सुपरिचित कवयित्री। आदिवासी संवेदना-सरोकारों के लिए उल्लेखनीय।

सुपरिचित कवयित्री। ग्यारह पुस्तकें प्रकाशित।