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विद्यानिवास मिश्र

गोरखपुर, उत्तर प्रदेश

विद्यानिवास मिश्र की संपूर्ण रचनाएँ

निबंध 1

 

उद्धरण 1

एक प्रकार से नाम और रूप ही सृष्टि का पर्याय है, नाम सूत्र है, रूप विस्तार है। नाम प्रतीतियों की अविच्छिन्न श्रृंखला है, रूप प्रतीति का एक गृहीत क्षण। नाम सूक्ष्म है, रूप स्थूल।

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