1950 | सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश
सुप्रसिद्ध कथाकार-उपन्यासकार। ग्रामीण जीवन के विश्वसनीय कथाकार के रूप में उल्लेखनीय।
किर्र-किर्र-किर्र घंटी बजती है। एक आदमी पर्दा उठाकर कमरे से बाहर निकलता है। अर्दली बाहर प्रतीक्षारत लोगों में से एक आदमी को इशारा करता है। वह आदमी जल्दी-जल्दी अंदर जाता है। सवेरे आठ बजे से यही क्रम जारी है। अभी दस बजे ए.डी.एम. साहब को दौरे पर भी
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