1574 - 1682 | इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश
भक्ति परंपरा के संत कवि। ‘अजगर करे ना चाकरी...’ जैसी उक्ति के लिए स्मरणीय।
उहां न कबहूँ जाइए, जहाँ न हरि का नाम।
दिगंबर के गाँव में, धोबी का क्या काम॥
जो तेरे घट प्रेम है, तो कहि-कहि न सुनाव।
अंतरजामी जानि है, अंतरगत का भाव॥
दया धर्म हिरदे बसै, बोलै अमृत बैन।
तेई ऊँचे जानिए, जिन के नीचे नैन॥
किरतिम देव न पूजिए, ठेस लगे फुटि जाय।
कहैं मलूक सुभ आत्मा, चारों जुग ठहराय॥
राम-राम के नाम को, जहाँ नहीं लवलेस।
पानी तहाँ न पीजिए, परिहरिए सो देस॥
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