Font by Mehr Nastaliq Web
noImage

खूब चंंद्र

बुंदेली फागों के लिए स्मरणीय कवि।

बुंदेली फागों के लिए स्मरणीय कवि।

खूब चंंद्र की संपूर्ण रचनाएँ

दोहा 1

आवत सखी बसंत के, कारन कौन विशेष।

हरष त्रिया को पिया बिना, कोइल कूकत देख॥

  • शेयर
 

चौकड़ियाँ 1

 

Recitation