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जान कवि

सूफ़ी संत और नीतिकार। ब्रजभाषा पर अधिकार। नीति वर्णन के लिए दोहा और सोरठा छंद का चुनाव।

सूफ़ी संत और नीतिकार। ब्रजभाषा पर अधिकार। नीति वर्णन के लिए दोहा और सोरठा छंद का चुनाव।

जान कवि की संपूर्ण रचनाएँ

दोहा 20

परज्या कौ रक्षा करै सोई स्वामि अनूप।

तर सब कौं छहियाँ करै, सहै आप सिर धूप॥

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जानि लेहू कवि जान कहि, सो राजत संपूर।

जामै ह्वै ये तीन गुन न्याई दाता सूर॥

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ताकौं ढील कीजिए ह्वै जु धरम को काजु।

को जानैं कल ह्वै कहा करिबो सो करि आजु॥

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न्याव कोऊ पाइहै, परै लालची काम।

सोई साचे होत है, जाकी गँठिया दाम॥

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सदा झूठहीं बोलिहैं, तिहि आदर घटि जाइ।

कबहू बोलै साँचु वहु, तऊ को पतियाइ॥

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