हरीराम व्यास की संपूर्ण रचनाएँ
दोहा 20
‘व्यास’ न कथनी और की, मेरे मन धिक्कार।
रसिकन की गारी भली, यह मेरौ सिंगार॥
- फ़ेवरेट
-
शेयर
‘व्यास’ बचन मीठे कहै, खरबूजा की भाँति।
ऊपर देखौ एक सौ, भीतर तीन्यों पाँति॥
- फ़ेवरेट
-
शेयर
मुख मीठी बातें कहै, हिरदै निपट कठोर।
व्यास कहौं क्यों पाय हैं, नागर नंदकिसोर॥
- फ़ेवरेट
-
शेयर
‘व्यास’ बड़ाई लोक की, कूकर की पहिचानि।
प्रीति करै मुख चाटही, बैर करै तनु-हानि॥
- फ़ेवरेट
-
शेयर
‘व्यास’ मिठाई विप्र की, तामे लागै आगि।
बृंदाबन ते स्वपच की, जूठहि खैए माँगि॥
- फ़ेवरेट
-
शेयर