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दुरगा

फाग कवि।

फाग कवि।

दुरगा की संपूर्ण रचनाएँ

दोहा 1

नैनन में बिस बहुत है, ना मारौ दिलजान।

गुरन-गुरन बिंध जायगौ, कैसें निकरैं प्रान॥

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चौकड़ियाँ 4

 

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