वे दिन भी क्या दिन थे
घटना महत्त्वपूर्ण थी वरना कुम्मी अपनी डायरी में उसे क्यों लिखती। अपनी डायरी में उसने 17 मई सन् 2155 की रात को लिखा, “आज रोहित को सचमुच की एक पुस्तक मिली है।”
वह पुस्तक बहुत पुरानी थी। कुम्मी के दादा ने बताया था कि जब वे बहुत छोटे थे तब उनके दादा ने