Font by Mehr Nastaliq Web

परवर-परिकथा

parvar pariktha

प्रकाश उदय

प्रकाश उदय

परवर-परिकथा

प्रकाश उदय

और अधिकप्रकाश उदय

    आजु सट्टी में पहिल-पहिल लउकल परोरा

    हरियाइ गइल बा

    देखऽ परवर-नयन से लखत चहुँओरा

    हरियाइ गइल बा

    अभी कुछ दिन टुकुर-टुकुर ताके के बा

    फेरु कबो-कबो भाव-ताव थाहे के बा

    अब तनी-तनी परस सरस होखे लगल

    अब तुरहो जियत तनी जोखे लगल

    पटियाइ गइल बा

    अब तियना से भुँज़िया ले पहुँचल परोरा

    पटियाइ गइल बा

    अब गवना-बियाह-तिलक थमलस परोरा

    पटियाइ गइल बा

    अब आलू में परवर भुलावे के ना

    अब परवर में आलू मिलावे के बा

    अब देसी-चलानी में बाँटे के

    पिया, पकल-पनसोह तनी छाँटे के

    ससताइ गइल बा

    देखऽ गाँजल बा सट्टी में बोरा-के-बोरा

    ससताइ गइल बा

    अब लायक बड़कवन के नइखे परोरा

    ससताइ गइल बा

    जले पा के भावे बिकात रहुए

    तले बड़िए सवाद से खवात रहुए

    अब भावे बिकाता पसेरी के

    का दो के खाई खा-खा के छेरी के

    पटुआइ गइल बा

    अछा कुछ दिन में रेयर हो जाई परोरा

    पटुआइ गइल बा

    तब फेरु तनी फेयर हो जाई परोरा

    पटुआइ गइल बा

    स्रोत :
    • पुस्तक : अरज-निहोरा (पृष्ठ 66)
    • रचनाकार : प्रकाश उदय
    • प्रकाशन : राजकमल प्रकाशन
    • संस्करण : 2020

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY