तुम नहीं जानते कि प्रेम क्या होता है
tum nahin jante ki prem kya hota hai
किम ऐडोनिज़ियो
Kim Addonizio
तुम नहीं जानते कि प्रेम क्या होता है
tum nahin jante ki prem kya hota hai
Kim Addonizio
किम ऐडोनिज़ियो
और अधिककिम ऐडोनिज़ियो
लेकिन तुम जानते हो कि इसे मेरे भीतर कैसे जगाया जाए
जैसे किसी किसी मृत लड़की को नदी से
खींचकर बाहर निकाला जाए
तुम जानते हो कि कैसे
कीचड़ को धो दिया जाए
हमारे अतीत की बदबू को साफ़ किया जाए
कैसे बिल्कुल नए सिरे से शुरू किया जाए
यह प्रेम तो उठकर बैठ भी जाता है
और पलकें झपकाता है
इससे हैरान, वह कुछ लड़खड़ाते क़दम उठाती है
किसी भी दिन अब वह कुछ सामान्य खाने की कोशिश भी करेगी
वह एक तेज़ कार में बैठना चाहेगी, वह कार जो
ज़मीन के अधिक क़रीब होती है
और रेगिस्तान में किसी ऐसे
उपेक्षित और उदास ठिकाने तक
गाड़ी चलाकर जाएगी
जहाँ वह शराब पी सके
धुत नशे में हो
और फिर
अर्द्धनग्न हो नाच सके
तुम जानते हो कि वह किस ओर जा रही है
तुम जानते हो कि वह जागेगी
एक ऐसे दर्द के साथ
जिसका स्रोत वह पहचान नहीं पाएगी
वह जागेगी बिना पैसों के
और एक भयानक प्यास के साथ
तो धिक्कार है
तुम्हारे उन गर्म हाथों को
जो मेरी क़मीज़ के भीतर फिसलते हैं
और तुम्हारी उस जीभ को
जो मेरे गले तक उतर जाती है
ऑक्सीजन की नली की तरह
मुझे ढँक दो
काले प्लास्टिक में, शोक मनाने वालों को
भीतर आने दो।
- रचनाकार : किम ऐडोनिज़ियो
- प्रकाशन : हिन्दवी के लिए शायक आलोक द्वारा चयनित
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