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जाति-दंस, बड़ा कलंक

jati dans, baDa kalank

आशाराम ‘जागरथ’

आशाराम ‘जागरथ’

जाति-दंस, बड़ा कलंक

आशाराम ‘जागरथ’

और अधिकआशाराम ‘जागरथ’

    सूअरबारा उजरी कोठरी

    चुप्पे घुसरी ग़ुरबत पसरी

    फुटही खपरी मुँह बाये परी

    झिलरी खटिया कथरी-गुदरी

    चूल्हा आगे टुटही खाँची

    खाँची मा आमे कै पाती

    डुडुवायँ बिरावैं माँग खायँ

    मंगता-जोगी औ’ सन्यासी

    कूकुर-बिलार घर ना झाकैं

    मुसरी घुसरैं ना डेहरी मा

    यकतनहा नीम कै पेड़ गवाह

    बचा बा पाहीमाफी मा

    मोटी बुद्धी गुरबा-गरीब

    लोगै टुकारि कै गोहरावैं

    टुनकी मारैं मूड़े ऊपर

    बिन बात चिढ़ावैं गरियावैं

    बेगार करावैं बड़वरके

    माखौल उड़ावैं हरजाई

    अब उहै निहाद कि निबरे कै

    मेहरी सबही कै भउजाई

    इक रात छोभ फूटा अइसन

    कि आगि लाग खरिहाने मा

    यकतनहा नीम कै पेड़ गवाह

    बचा बा पाहीमाफी मा

    दिन-रात खेत मा खटत रहे

    वै बड़न कै सेवा करत रहे

    वइसन तौ देस अजाद रहा

    मुल सूद-अछूत गुलाम रहे

    पैलगी दूर से करत रहैं

    परछाहीं बचा के चलत रहैं

    बाभन-ठाकुर केव आइ जाय

    खटिया पर से उठि जात रहैं

    जे नीक कै कपड़ा पहिरै

    खटकै सबहिन् की आँखी मा

    यकतनहा नीम कै पेड़ गवाह

    बचा बा पाहीमाफी मा

    कतहूँ-कतहूँ फुंसी-फोड़ा

    मूड़े मा ढीलौ-लीख भरा

    करिया धागा गटई पहिरे

    तन पे झिलरा चीकट कपड़ा

    देहीं मा पाले दाद-खाज

    किस्मत काँ कोसै मुस्कियाय

    यक बिगहा मुँह फैलाय लियै

    जब खबर-खबर खजुली खजुवाय

    माई तू काहे जनम दिह्यू

    जात-पात की माटी मा

    यकतनहा नीम कै पेड़ गवाह

    बचा बा पाहीमाफी मा

    टुटहा जस्ता दुइ-यक बरतन

    ज्यों साँझ ढलै बाजै खनखन

    जब खाय काँ घर मा ना आटै

    तब खायँ मरा डांगर जबरन

    खरिहान कै गोहूँ खाय-खाय

    जो गोबर बैलय करत रहे

    वोका बटोरि सुखवाय लियैं

    फिर पीट-पाट कै पीस लियैं

    दुःख-वीर दलिद्दर दलित रहे

    गोबरहा अन्न मजबूरी मा

    यकतनहा नीम कै पेड़ गवाह

    बचा बा पाहीमाफी मा

    हम तौ ठहरेन खेतिहर मजूर

    उप्पर जुग्गातन छुआछूत

    ग़ुरबत मा रोजै गम खाई

    तोहरे घर धन-दौलत अकूत

    देहीं खुमार मन मा गुबार

    अललाय खमोसी चढ़ि कपार

    आँखी से टप-टप खून चुवै

    ऐ! कब्जेदारों खबरदार

    अपने राही तू मगन रहौ

    पीछे मुड़ि देख्यौ ना हमकाँ

    यकतनहा नीम कै पेड़ गवाह

    बचा बा पाहीमाफी मा

    स्रोत :
    • पुस्तक : पाहीमाफी (पृष्ठ 85)
    • रचनाकार : आशाराम ‘जागरथ’
    • प्रकाशन : रश्मि प्रकाशन, लखनऊ
    • संस्करण : 2021

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