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सहायता देगा

sahayata dega

निकोलाई रेरिख

निकोलाई रेरिख

सहायता देगा

निकोलाई रेरिख

और अधिकनिकोलाई रेरिख

    बालक, तुमसे फिर ग़लती हुई है।

    तुमने कहा कि तुम्हें सिर्फ़ अपनी अनुभूतियों पर

    विश्वास है।

    आरंभ में इसकी प्रशंसा हो सकती है,

    पर उन अनुभूतियों से हम कैसे निपटेंगे

    तो ज्ञात नहीं आज तुम्हें

    पर जिन्हें मैं जानता हूँ?

    अभी अपूर्ण है आरंभ की वे अनुभूतियाँ,

    जिन पर, तुम कहते हो, विश्वास करो।

    क्या तुम्हारे वश में है सुनने की शक्ति?

    कमज़ोर हैं तुम्हारी आँखें।

    स्पर्श-शक्ति भी अविकसित है अभी।

    अज्ञात अनुभूतियों के विषय में

    तुमने मुझ पर विश्वास नहीं किया।

    मैंने तुमसे पानी की एक बूँदें देखने को कहा

    बिना ऐनक या लेंस के—

    हवा में रह रहे कीटाणुओं के बारे में

    कुछ बताने को कहा।

    तुम मुस्करा दिए।

    तुम चुप हो गए।

    तुमने कोई उत्तर नहीं दिया।

    बालक, पथ प्रदर्शन पाते रहना

    अपने मन से

    जीवन में उसी से सहायता मिलेगी तुम्हें।

    स्रोत :
    • पुस्तक : निकोलाई रेरिख की कविताएँ (पृष्ठ 53)
    • रचनाकार : निकोलाई रेरिख
    • प्रकाशन : रेरिख अध्ययन परिषद, नई दिल्ली
    • संस्करण : 1995

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