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स्विच

svich

अनुवाद : लक्ष्मीधर मालवीय

क्या होता है चुप रहने से

फड़कते रहेंगे होंठ

कसर रहेगी बस गले से निकलने की आवाज़

झरते रहेंगे बोल

बोलने वाले एक तुम्हीं नहीं हो

वह तो तुम्हारा मुखौटा लगाए हुए खिलौना है

घूम रही है दिमाग़ में गड़ारी

हर कहीं बिकती कैसेट टेप की

सच कहूँ तो महज़ शोर

जाने कितनी बार सुना हुआ उपदेश

ज़रा भी नहीं बदला है वह

क्या होता है चुप रहने से

महसूस करना चाहता हूँ अपने तन-बदन पर

सोचना चाहता हूँ अपने दिल से

डर नहीं है भूलें करने का

खड़े हो तुम गो मेरे सामने

लगता है देख रहा हूँ तुम्हें टीवी पर

बुझाना चाहता हूँ तुम्हें पर स्विच जो नहीं है।

स्रोत :
  • पुस्तक : सूखी नदी पर ख़ाली नाव (पृष्ठ 59)
  • संपादक : वंशी माहेश्वरी
  • रचनाकार : शुन्तारो तानीकावा
  • प्रकाशन : संभावना प्रकाशन
  • संस्करण : 2020

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