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कस उबीधा वहु

अजूबा

हाहाहूती

जस दोसर सुना

जुगाधिन ते जमा

जहाँ का तहाँ

टस मस

पाँवन मा पहाड़

मूंड़ पर नीला मुरइठा

जेहि का ओरु छोरु

अपने भीतर भरे संसारु

सर पर धरे आसमानु

हाथन मा छितिज

सांसन मा बवंडरु

मउत मुट्ठी मा

अपने भितरइ फंलागति फिरह

म्वाट, महीन

बालक, बूढ़

घटइ, बढ़इ

जस का तस

प्याट मा ज्वालामुखी

मुला आँखि मा दया का सागरु

स्वावइ, जागइ

सुनि कइ कहानी

कान चौकन्ने

मन भौचक्का

कउनउ पाइसि पार

स्रोत :
  • पुस्तक : घास के घरउँदे (पृष्ठ 92)
  • रचनाकार : श्यामसुंदर मिश्र ‘मधुप’
  • प्रकाशन : आत्माराम एण्ड संस, कश्मीरी गेट, दिल्ली
  • संस्करण : 1991

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