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कर्ता, कर्म, वाक्य

karta, karm, vakya

स्टीफन स्पेंडर

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    कर्ता ने सोचा : क्योंकि उसके पास एक क्रिया है
    अनेक कर्मों वाली, इसलिए राजा है वह पूरे वाक्य का।
    स्वयं व्याकरण ने ही क्या नहीं कर दी थीं ये संज्ञाएँ उसके नाम?
    क्या नहीं था वही उसका सच्चा उत्तराधिकारी?
     
    कर्ता के कर्म थे—सुरा, सुंदरी, यश और संपत्ति।
    और एक आश्रित वाक्यांश— 'जो कुछ भी जीवन दे सकता है'
    इन सब वस्तुओं को पास रखने से उसका लगाव इतना बढ़ा
    कि अंततः उसने पाया वह तो व्यक्तिनिष्ठ हुआ जा रहा है
     
    ‘कर्ता', कोश ने उसे चेताया—अर्थात्, 'वह जो अनुशासित होता है
    व्यक्ति या वस्तु से'। तो क्या वह दास नहीं हो गया 'पास रखने' का?
    तटस्थल की उपलब्धि के लिए, उसे होना होगा कर्मवाचक
    अर्थात छुड़ाना होगा अपने आप को स्वामी बनने की क्रिया से।
     
    तटस्थता की खोज में उसने परखा अपने वाक्य के आस-पास के
    समूचे संदर्भ को, ताकि रख सके उसे एक समुचित परिप्रेक्ष्य में :
    व्याख्या की उसने, और आलोचनात्मक विश्लेषण,
    और तब फिर से पढ़ा उसे—अपने को अधिक वस्तुनिष्ठ अनुभव करते हुए
     
    तब अचानक एक झटके के साथ पता चला उसे कि यह 'वाक्य' तो
    कर्ता-कर्म की भाँति ही मायावी और दुहरे अर्थ वाला है।
    वाक्य तो अभिशप्त है जैसा निकला, वैसा बने रहने को
    जैसे ‘आजीवन कारावास’ अथवा 'प्राणदंड' सरीखे ब्रह्मवाक्यों में, उदाहरणार्थ।
     
    स्रोत :
    • पुस्तक : पुनर्वसु (पृष्ठ 49)
    • संपादक : अशोक वाजपेयी
    • रचनाकार : स्टीफन स्पेंडर
    • प्रकाशन : राजकमल प्रकाशन, नई दिल्ली
    • संस्करण : 1989
    हिंदी क्षेत्र की भाषाओं-बोलियों का व्यापक शब्दकोश : हिन्दवी डिक्शनरी

    हिंदी क्षेत्र की भाषाओं-बोलियों का व्यापक शब्दकोश : हिन्दवी डिक्शनरी

    ‘हिन्दवी डिक्शनरी’ हिंदी और हिंदी क्षेत्र की भाषाओं-बोलियों के शब्दों का व्यापक संग्रह है। इसमें अंगिका, अवधी, कन्नौजी, कुमाउँनी, गढ़वाली, बघेली, बज्जिका, बुंदेली, ब्रज, भोजपुरी, मगही, मैथिली और मालवी शामिल हैं। इस शब्दकोश में शब्दों के विस्तृत अर्थ, पर्यायवाची, विलोम, कहावतें और मुहावरे उपलब्ध हैं।

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