Font by Mehr Nastaliq Web

अक्षर गीत

akshar geet

मंजुल भार्गव

अन्य

अन्य

मंजुल भार्गव

अक्षर गीत

मंजुल भार्गव

और अधिकमंजुल भार्गव

    नोट

    प्रसतुत पाठ एनसीईआरटी की कक्षा एक के पाठ्यक्रम में शामिल है।

    अनार दाड़िम भी कहलाता।

    आम चूसकर बच्चा खाता॥

     

    इमली तो खट्टी होती है।

    ईख सदा मीठी होती है॥


    उल्लू रात में जगते रहते।

    ऊदबिलाब जल-थल में रहते॥


    ऋषि-मुनि आकर हवन कराते।

    ऋ तो संस्कृत में ही पाते॥


    (लृ भी संस्कृत में ही होता।

    लृ का तो कुछ पता न चलता॥)


    एड़ी में काँटा चुभ जाता।

    ऐनक कानों पर चढ़ जाता॥


    ओखल में कूटते हैं अनाज।

    औसधी करती रोग इलाज॥


    स्वर सब यहीं समाप्त होते हैं।

    अब हम व्यंजन पर चलते हैं॥


    अंशक अमरूदों के लाओ।

    अ: अ: सब मिल उनको खाओ॥


    कमल ताल में सबको भाते।

    खरल में मसाले पिस जाते॥


    गमलों में पानी दे आना।

    घड़ियालों के पास न जाना॥


    कङ्घे से माँ बाल बनाती।

    क से ङ् ध्वनि कंठ से आती॥


    चम्मच से हम खाना खाते।

    छतरी बारिश में ले जाते॥


    “जन-गण-मन” सब बच्चे गाते।

    झंडा खंभे पर फहराते॥


    पञ्चम स्वर में कोयल गातीं।

    च से ञ ध्वनि तालु से आती॥


    टट्टू रस्ते में अड़ जाता।

    ठठेरा उत्तम पात्र बनाता॥


    डलिया में तुम फूल सजाओ। 

    ढक्कन शीशी पर लगवाओ॥


    पण्डिता हमको पाठ पढ़ातीं। 

    ट से ण ध्वनि मूर्धा से आतीं॥


    तबला लड़का बजा रहा है। 

    थर्मस से चाय पिला रहा है॥


    दरी बैठ हम गाना गाते। 

    धनुष उठा हम तीर चलाते॥


    नल से नानी पानी लातीं।

    त से न ध्वनि दाँत से आतीं॥


    पतङ्ग से बच्चे पेच लड़ाते। 

    फल पेड़ों से तोड़कर खाते॥


    बन्दर कूद-फाँदकर आए। 

    भगोने लोटे सब लुढ़काए॥

     

    मटर-कचौरी बुआ बनातीं। 

    प से म ध्वनि ओष्ठ से आतीं॥


    यज्ञ में घी की आहुति देते। 

    रबड़ी हलवाई से लेते॥


    लवण नमक को भी हैं कहते। 

    वनमानुष जङ्गल में रहते॥


    दो-स्वर-मेल से य र ल व आते। 

    अतः अर्धस्वर ये कहलाते॥


    शरीफ़ा पकने पर ही खाओ। 

    षट्‌कोण चित्र स्वयं बनाओ॥


    सप्तर्षि आकाश चमकाते। 

    हल किसान खेतों में चलाते॥


    श ष स ह ऊष्म कहाते। 

    अक्षर यहीं समाप्त हो जाते॥


    यही वर्णमाला हम गाते। 

    मिल-जुल अपना ज्ञान बढ़ाते!

     

    आपको अब सब अक्षर आते?

    वीडियो
    This video is playing from YouTube

    Videos
    This video is playing from YouTube

    मंजुल भार्गव

    मंजुल भार्गव

    स्रोत :
    • पुस्तक : सारंगी (पृष्ठ 111)
    • रचनाकार : मंजुल भार्गव
    • प्रकाशन : एनसीईआरटी
    • संस्करण : 2022

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY