एक प्रेमिका का
माँ हो जाना
पुरुष को पिता होना सिखाता है
एक स्त्री का
उसके हाथ हो जाते हैं
कोमल और वाणी नरम
उसका शरीर हो जाता है सुगंधित
उसका स्वरूप निखरता है
पौरुष पिघलता है
दिल पसीजता है
नाक तनती नहीं बात-बात पर
मूँछें खिलौने की तरह
खेलने को आकर्षित करती हैं
निहारते रहने को जी करता है
ऐसे प्रेमिल जोड़े को
जो दो नहीं रहते
स्त्री-पुरुष का भेद मिटाते
एक हो जाते हैं।
- रचनाकार : सौरभ मिश्र
- प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित
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