मोन पड़ैत हेतौ तोरो
mon paDait hetau toro
सङिता! निश्चय तोरो मोन पड़ैत हेतौ
जहर कनैलक गाछ तरक
बिसहाराक गहबर सन एगो इसकूल
भगतियाक मुद्रामे बैसल कोनो गुरुजी
आ गुरुजीक हाथक
बेंतक दुखमोचनी छौंकीक डर स' सिटपिटाएल ठाढ़ चटिया सब।
आकि मकैक खेत सन बेघर कोनो इसकूल
गीदड़ जेकाँ हो-हल्ला मचबैत, उद्धत-चटिया सब
आ ओगरबाह जकाँ। कुरसीक मचान पर झुकैत बीच-बीचमे
गुरुजीक डोकाक हार सन खड़खहाड़ स्वर
निश्चय मोन पड़ैत हेतौ तोरो
आकि मोन पड़ैत हेतौ मुखियाजी
कि राय साहेबक दलान आकि
भुसखाँड़ बनल कोनो इसकूल
जिरतिया आकि मनेजर बनल कोनो मास्टर।
भूतकाल के अनुरागक नै
राग-द्वेषक पाठ पढ़बैत, भविष्य पर मरछाउर छिटैत
हम पुछै छियौ सङिता
आखरिस कहिया धरि
निर्माणक सबटा बात आ बाट
परीकथे बनल रहतै?
कुशिक्षाक नोनियाएल नियों पर
राष्ट्रक मोकाम बनैत रहतै
ढहैत रहतै?
- पुस्तक : ऐ अकाबोन मे (मैथिली कविता-संग्रह) (पृष्ठ 72)
- रचनाकार : राज
- प्रकाशन : नवारम्भ, पटना
- संस्करण : 2011
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