कुहरीले धुँधले बादलों को पार कर आईं तुम
kuhrile dhundhale badlon ko paar kar ain tum
ओसिप मंदेलश्ताम
Osip Mandelstam

कुहरीले धुँधले बादलों को पार कर आईं तुम
kuhrile dhundhale badlon ko paar kar ain tum
Osip Mandelstam
ओसिप मंदेलश्ताम
और अधिकओसिप मंदेलश्ताम
कुहरीले
धुँधले बादलों को
पार कर आईं तुम
तुम्हारे कोमल गाल
हो उठे हैं लाल
दिन यह ठंडा बहुत बीमार है
और मैं डोल रहा हूँ यूँ ही
बदहवास-सा
मेरे ऊपर आलस्य व
उदासी सवार है
यह दुष्ट पतझड़
टोटका कर रहा है हम पर
पके फलों से धमकाए
देखो तो कैसा झूम रहा है
शिखरों से बात करे वह
चोटी पर चढ़कर
मकड़ी के जालों की जैसे
आँखें चूम रहा है
तेरे गालों की लाली का
यह कैसा प्रमाद है सब पर
जीवन का बेचैन नृत्य
चुपके से रुक गया है
उभर रहा है सूर्य अरुणिम
दूर वहाँ क्षितिज पर
धुँधले बादलों का कुहरा
पीछे छुप गया है।
- पुस्तक : तेरे क़दमों का संगीत (पृष्ठ 21)
- रचनाकार : ओसिप मंदेलश्ताम
- प्रकाशन : शिल्पायन, दिल्ली
- संस्करण : 2005
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