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आवा बसन्तु छावा बसन्तु

aava basantu chhava basantu

बलभद्रप्रसाद दीक्षित 'पढ़ीस'

बलभद्रप्रसाद दीक्षित 'पढ़ीस'

आवा बसन्तु छावा बसन्तु

बलभद्रप्रसाद दीक्षित 'पढ़ीस'

और अधिकबलभद्रप्रसाद दीक्षित 'पढ़ीस'

    बउरे आँबन की डारन क्वयिली मदमहती बूँकयि लागी;

    भँउरा फूलन का चूमि-चूमि झन्नायि उठे, भन्नाय लाग;

    कटनासु बसन्ती ब्वालन पर गरगय्या ते अठिलायि लाग;

    तुइ बड़ी जुवानि समानि देखु,

    आवा बसन्तु छावा बसन्तु!

    कोई बनरा अस बना-ठना, जानउ जनवासे जाइ रहा,

    चिरई चुन-गुन बिरवा किरवा तकु, बिहँसि उठे अगवानी का;

    अधखिली कली कचनार, कुआँरी कन्या की आभा ओढ़े,

    पूजयि लागीं, परिछयि लागीं,

    आवा बसन्तु छावा बसन्तु!

    फूलन की केसरि भरी बयारी, लपटि-लपटि लहँकयि लागीं,

    बेली फूलन के घूँघट काढ़े, दुलहिन असि महकयि लागीं,

    सहिंजन से हँसि-हँसि फूल झरयिं, पछियउहा जब धक्का मारयि—

    करुआ कस फूलि-फूलि गावयि,

    आवा बसन्तु, छावा बसन्तु!

    दिनु अयिस मातदिल जान परयि, गरमी-सरदी का भेदु भूला,

    स्वँतियन का पानी जूड़-जूड़, चीखति मा कयिस नीक लागयि,

    कथरी-गुदरी कोने धरिकयि, चरवाह कंज गोली ख्यालयिं,

    गंधरब अलापि बसन्तु रहे,

    आवा बसन्तु छावा बसन्तु

    माह की उजेरी पाँचयि ते, डूँड़ी-डँगरिउ कूदयि लागीं,

    ह्वरिहार अरंडा गाड़ि-गाड़ि, फिर अण्टु-सण्टु अल्लायि लाग,

    लरिका खुरपा के बेंटु अपिस, तउनउ कबीर चिल्लायि चले,

    बाबा बुढ़वा बउरायि उठे,

    आवा बसन्तु, छावा बसन्तु!

    स्रोत :
    • पुस्तक : पढ़ीस ग्रंथावली (पृष्ठ 141)
    • संपादक : डॉ. रामविलास शर्मा, युक्तिभद्र दीक्षित
    • रचनाकार : बलभद्रप्रसाद दीक्षित 'पढ़ीस'
    • प्रकाशन : उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान, लखनऊ
    • संस्करण : 1998

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