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सड़क सँ कतिआयल सड़क कात

saDak san katiayal saDak kaat

सुमित मिश्र गुंजन

सुमित मिश्र गुंजन

सड़क सँ कतिआयल सड़क कात

सुमित मिश्र गुंजन

और अधिकसुमित मिश्र गुंजन

    लोहारक भाथी जकाँ

    चलैत रहै छै शहर

    यात्रीक आँख मे बीतैत अछि सड़क

    पानि डेंगायब सन निरर्थक काज मे

    अनेरो अपसियाँत ट्रैफिक-पुलिस

    रोड परहक सभ सँ बेकार आदमी लगैत अछि

    नोकरी लेल डिरियाइत हमरा सन लोक

    बेकार आदमी बनबाक प्रक्रिया मे होइत छी

    ओतहि सड़क कात

    छोटछीन उठौआ दोकान सजेने लोक

    स्वयं केँ काजुल प्रमाणित करबाक ब्योंत मे

    ओना त'

    घनेरो घटना होइ छै भरि दिन

    मुदा राति बितने बदलैत अछि दृश्य

    मुँह पर पाउडर क्रीम पोतने

    बेर-बेर ठोररंगा केश सरिअबैत

    ककरो प्रतीक्षा मे चौचंक भेल

    सड़क कात ठाढ़ स्त्री

    कोनो अनभुआर कार मे बैसिक'

    जाइ छै काज पर

    अनकर भूख मेटाक'

    अपन परिवार लेल भोजनक ओरिआन मे

    सड़क कात—

    कुकूरक बीच सूतल लोक

    अबस्से बनेतै अपन घर

    अरजतै धन-सम्पत्ति

    संगोर हेतै समाजक मुख्य धारा मे

    साबित करतै

    आब नहि रहलै कुकूर

    सभकिछु करतै

    जे नहि केलकै कहियो

    सपना देखबा मे कोन हर्ज?

    बीच सड़क पर धक्का लगला सँ

    मरल लोक जानवर

    समूचा शहरक कचड़ा

    आम जनता कहाब'बला जीव

    पागल सन लागैबला पागल

    सभ्य जंगल सँ बाहर कयल गेल

    अनेरुआ जंगल-झाड़

    बेकार समाज सँ परित्यक्त

    सभटा वस्तुक एकमात्र आश्रय होइत अछि

    'सड़क सँ कतिआयल सड़क कात।'

    स्रोत :
    • पुस्तक : पेटकुनियाँ लधने प्रश्न (पृष्ठ 19)
    • रचनाकार : सुमित मिश्र गुंजन
    • प्रकाशन : नवारम्भ, पटना/मधुबनी
    • संस्करण : 2024

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