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मारो न मोहें पिचकारी

maro na mohen pichkari

मनोज मिश्र ‘कप्तान

मनोज मिश्र ‘कप्तान

मारो न मोहें पिचकारी

मनोज मिश्र ‘कप्तान

और अधिकमनोज मिश्र ‘कप्तान

    बलम जी, मारो मोहें पिचकारी।

    रंग बिरंगा भये गुलगुला, बदरंग भई तरकारी। बलम जी

    हमरे जिम्मे काम बहुत है, तुम बैठे सरतारी। बलम जी

    ना खेती कै काम किहा हौ, ना बिरवा ना बारी। बलम...

    लड़िकन फीस बीस से ऊपर, केहकै मोंछि उखारी। बलम जी

    गैस छोड़ि अब भैंस कै गोबर, चूल्हप काया जारी। बलम जी

    नाहक मा कप्तान बना हौ, तनिक जिम्मेदारी। बलम जी...

    स्रोत :
    • पुस्तक : अवधी मिठास (पृष्ठ 99)
    • रचनाकार : मनोज मिश्र ‘कप्तान’
    • प्रकाशन : सर्वभाषा प्रकाशन, नई दिल्ली
    • संस्करण : 2025

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