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रंग का फ़र्क़

rang ka farq

शिवमंगल सिद्धांतकर

शिवमंगल सिद्धांतकर

रंग का फ़र्क़

शिवमंगल सिद्धांतकर

हज़ारों हज़ार साल तक यदि मैं इंतज़ार

करता हूँ

पोखर और मछली का इंतज़ार

घुड़सवार को पछाड़ती हुई

मिथिला का लाज पानी चाहते हुए

साठे पाठे ने किस क़दर

अबरक हँसी में मिलाया है

किस क़दर किसी कुंभ रौंदे को घरौंदे तक

लाया है

मिट्टी को माँग तक पहुँचाते हुए

चिमनी से कालिख कटोरे भर लाया है

सिंदूर कहता हुआ

सिर्फ़ रंग का फ़र्क़ होता है

धूल का काम धूल करती है

स्रोत :
  • पुस्तक : काल नदी (पृष्ठ 65)
  • रचनाकार : शिवमंगल सिद्धांतकर
  • प्रकाशन : राग विराग प्रकाशन
  • संस्करण : 2003

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