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धनि अवधी जेहिं राम बखानी

dhani avadhi jehin raam bakhani

मनोज मिश्र ‘कप्तान'

मनोज मिश्र ‘कप्तान'

धनि अवधी जेहिं राम बखानी

मनोज मिश्र ‘कप्तान'

और अधिकमनोज मिश्र ‘कप्तान'

    कलि मल हर, माँ सरजू पानी।

    रघुवर की प्रिय तोतर बानी।

    अवध नगर की राजित भाषा, धनि अवधी जेहिं राम बखानी

    धनि साकेत अजोध्या नगरी।

    धन्य गली, धनि कूचा, डगरी।

    चक्रवर्ति दशरथ से राऊ,

    जानत त्रिभुवन पुन्य प्रभाऊ।

    धनि धनि गुरु वसिष्ठ से ज्ञानी, धनि अवधी जेहिं राम बखानी

    धन्य धाम, धनि चारिउ भइया।

    धनि कैकेई, कौसिला मइया।

    धन्य सुमित्रा सी उपकारी।

    लखन, सत्रुघ्न की महतारी।

    गाधितनय महर्षि विग्यानी, धनि अवधी जेहिं राम बखानी

    जपत निरंतर जय सियरामा।

    धन्य भरत, धनि नंदीग्रामा।

    अवधी गुन गावत बजरंगी।

    कुमति निवार सुमति के संगी।

    धनि 'मैथिल' जहँ भईं भवानी, धनि अवधी जेहिं राम बखानी

    अवधी बोल, अवध कै बचना।

    धनि तुलसी, धनि मानस रचना।

    पद्मावत जन-जन हिय भायस।

    धन्य कथानक, धनि कवि जायस।

    भीज नयन, सुनि करुण कहानी, धनि अवधी जेहिं राम बखानी

    वर्तमान के कुसल चितेरे।

    बिनवहुं सबहिं, दूरि अरु नेरे।

    मन, बच, कर्म, करहिं नित सेवा।

    कथा, जागरण, काव्य कलेवा।

    धन्य जुड़ाव, जनम, जिनगानी, धनि अवधी जेहिं राम बखानी

    स्रोत :
    • पुस्तक : अवधी मिठास (पृष्ठ 85)
    • रचनाकार : मनोज मिश्र ‘कप्तान’
    • प्रकाशन : सर्वभाषा प्रकाशन, नई दिल्ली
    • संस्करण : 2025

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