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किसी को इस गुलाब का पता नहीं

kisi ko is gulab ka pata nahin

अनुवाद : चंद्रबली सिंह

एमिली डिकिन्सन

एमिली डिकिन्सन

किसी को इस गुलाब का पता नहीं

एमिली डिकिन्सन

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    किसी को इस गुलाब का पता नहीं—
    संभव है यह तीर्थयात्री हुआ होता,
    अगर मैंने इसे पथों से नहीं तोड़ा
    और ऊपर उठाकर तुमको दिया होता।
    उसकी अनुपस्थिति वहाँ केवल एक मधुमक्खी को—
    दूर की यात्रा से उसके वक्ष पर शयन करने को
    वेग से लौटती हुई तितली को अखरेगी—
    मात्र एक पक्षी चकित होगा—
    मात्र एक हल्की हवा की आह निकलेगी—
    आह रे नन्हे गुलाब—कितना सुगम है
    तुम्हारे सरीखों का दिवंगत हो जाना!
    स्रोत :
    • पुस्तक : एमिली डिकिन्सन की कविताएँ : संचयन (पृष्ठ 27)
    • रचनाकार : एमिली डिकिन्सन
    • प्रकाशन : वाणी प्रकाशन, नई दिल्ली
    • संस्करण : 2011
    हिंदी क्षेत्र की भाषाओं-बोलियों का व्यापक शब्दकोश : हिन्दवी डिक्शनरी

    हिंदी क्षेत्र की भाषाओं-बोलियों का व्यापक शब्दकोश : हिन्दवी डिक्शनरी

    ‘हिन्दवी डिक्शनरी’ हिंदी और हिंदी क्षेत्र की भाषाओं-बोलियों के शब्दों का व्यापक संग्रह है। इसमें अंगिका, अवधी, कन्नौजी, कुमाउँनी, गढ़वाली, बघेली, बज्जिका, बुंदेली, ब्रज, भोजपुरी, मगही, मैथिली और मालवी शामिल हैं। इस शब्दकोश में शब्दों के विस्तृत अर्थ, पर्यायवाची, विलोम, कहावतें और मुहावरे उपलब्ध हैं।

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