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तुम गुलाब , उदास

tum gulab , udaas

निकोलास गुइयेन

निकोलास गुइयेन

तुम गुलाब , उदास

निकोलास गुइयेन

और अधिकनिकोलास गुइयेन

    रोचक तथ्य

    कवि ने यहाँ स्पानी शब्द "रोसा" का व्यवहार किया है जिसका अर्थ है गुलाब। पर स्पानी में यह किसी नारी का नाम भी हो सकता है।

    तुम गुलाब1, उदास

    उड़ने लगता है मन और उड़ता ही जाता है

    दूर तुम्हें ढूँढ़ता,

    वो गुलाब, उदास

    गुलाब मेरी यादों के।

    जब भोर

    भिगोती जाती है खेतों को,

    और दिन होता है उस बच्चे जैसा

    जो जागता है आसमान में,

    गुलाब तुम, उदास,

    छाया से भर जाती आँखें तुम्हारी

    अपनी सिकुड़ी चादर से

    तब छूता हूँ तुम्हारा कसा जिस्म।

    जब वह ऊँचा सूरज जल चुका हो

    अपनी ऊँची आग के साथ

    घिर आई हो जब साँझ,

    उस बिखरे पतन से

    दूर अपनी मेज़ पर से मैं

    देख रहा हूँ तुम्हारे घने जिस्म की ओर।

    और फिर एक ज्वलंत सन्नाटे से

    बोझिल रात में

    गुलाब, तुम उदास,

    गुलाब मेरी यादों के

    सुनहरे, जीवंत, भीगे,

    छत से नीचे उतरते जाते हो तुम,

    मेरा ठंडा हाथ अपने हाथों में लिए

    देखते जाते हो मुझे।

    बंद कर लेता हूँ फिर आँखें,

    मगर फिर भी हमेशा देखता हूँ तुम्हें,

    गड़े हुए वहाँ,

    अपनी नज़रें मेरे सीने में गड़ाए।

    निगाहें टिकी हुईं देर तक

    ख़ंजर हो जैसे कोई सपनों का।

    स्रोत :
    • पुस्तक : यह संपन्नता बिखरी हुई (पृष्ठ 195)
    • संपादक : श्यामा प्रसाद गांगुली, मीनाक्षी संद्रियाल
    • रचनाकार : कवि के साथ अनुवादक श्यामा प्रसाद गांगुली, मीनाक्षी संद्रियाल
    • प्रकाशन : साहित्य अकादेमी एवं ग्रूलाक
    • संस्करण : 2006

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